Thursday, August 16, 2012

हम पूरी लगन से लड़ते रहेंगे

अशोक गौतम
Story Update : Wednesday, August 15, 2012 1:23 AM
एकाएक विक्रम के कंधे से उछलकर बेताल ने भी देश को संबोधित करते हुए कहा,‘लो, आज एक बार फिर स्वतंत्रता दिवस आ गया। हर दिन तो मैं कुछ न कुछ कहता ही रहता हूं, पर आज मुझे विशेष रूप से कुछ कहना ही पड़ेगा। नहीं तो आप कहेंगे कि मैंने आज कुछ कहा ही नहीं।

हे हमसे निराश होते हमारे प्रिय वोटरो! आपको मालूम हो या नहीं, पर इस साल भी हमने बहुत तरक्की की, खासकर भ्रष्टाचार के क्षेत्र में। वे तो अभी मंगल के रास्ते में ही भटक रहे हैं, पर हमने अपने भ्रष्टाचार के रॉकेट को शनि तक पहुंचा दिया। अब हमारा भ्रष्टाचार का रॉकेट वहीं से बता देगा कि मंगल पर भ्रष्टाचार की संभावना है भी या नहीं। इस प्रकार हमारा यह अभियान भ्रष्टाचार के नए आयाम के द्वार खोलेगा। इस उपलब्धि के लिए मैं आप सबको हार्दिक बधाई देता हूं!

प्रसन्नता की बात है कि हम सबने मिल-जुलकर इस देश से ईमानदारी को सदा-सदा के लिए खत्म कर दिया है। सच कहूं, तो यह ईमानदारी देश पर चांद के दाग से भी बड़ा दाग थी। जब तक ईमानदारी को गुडबाय नहीं कहेंगे, आप विकास का वेलकम नहीं कर सकते। हाय रे बेचारे अन्ना! सचाई भी हमारे लिए कोढ़ में खाज की तरह थी। और मुझे इस मंच से यह कहते हुए अति प्रसन्नता हो रही है कि आप सबके सहयोग से उसका भी समूल नाश हो गया है। अब जनता मजे से झूठ बोलकर राष्ट्रीय गौरव की भागीदार हो सकेगी।

मुझे आप सबको यह बताते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि अब हमने राष्ट्रीयता, देशभक्ति, स्वाभिमान, नैतिकता जैसे वायरसों से समाज को मुक्त करने की क्षमता हासिल कर ली है। अब हमने भूख से लड़ना छोड़ दिया है, महंगाई से लड़ना छोड़ दिया है, गरीबी से भी लड़ना छोड़ दिया है। पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि भूख, गरीबी और महंगाई हमें बुजदिल समझे। हम चाहें, तो इन सब चीजों से बखूबी लड़ सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगेे। पॉलिटिक्स की भी अपनी मजबूरी है भाई! दरअसल हम राजनेताओं के पास आपस में लड़ने के सिवा इन समस्याओं से लड़ने के लिए वक्त ही नहीं बचता। हम सुबह उठकर आपस में लड़ना शुरू कर देते हैं और लड़ते-लड़ते ही सो जाते हैं।

बंधुओ! हम भूख, भय, बेरोजगारी, अशिक्षा, बीमारी, आर्थिक विषमता और असमानता से लड़ने के लिए पैदा ही नहीं हुए हैं। हम तो बस खुद को बचाए रखने के लिए एक दूसरे से लड़ने, एक दूसरे पर कीचड़ उछालने आए हैं। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि जब तक हमसे बन पड़ेगा, हम आपस में पूरी लगन से लड़ते रहेंगे। हमारे पास खुद को हर परिस्थितियों में बनाए रखने की अक्षुण्ण क्षमता है। स्वतंत्रता दिवस पर यही कामना है कि आगे भी भगवान इसे बनाए रखे।